रविवार, ८ नोव्हेंबर, २००९
माणूसकीची कमी झाली का ?
रस्ते रूंद झाले पण दृष्टी अरूंद झाली का ?
खर्च वाढला आणि शिल्लक कमी झाली
घरं मोठी पण कुटुंब छोटी॥
सुखसोयी पुष्कळ , पण वेळ दुर्मिळ झाला
पदव्या स्वस्त झाल्या आणि शहाणपण महाग
माहितीचे डोंगर जमले पण नेमकेपणाचे झरे आटले
तज्ञ वाढले आणि समस्याही वाढल्या
औषधं भरपूर पण आरोग्य कमी झालं
मालकीची भाषा वाढली ,मूल्यांची कमी झाली
आपण बोलतो फार...प्रेम क्वचित करतो॥ आणि तिरस्कार सहज करतो
राहणीमान उंचावलं पण जगणं दळभद्री झालं
आपल्या जगण्यात वर्षांची भर पडली , पण आपल्या वर्षांमध्ये जगण्याची नाही
आपण भले चंद्रावर आलो गेलोपण शेजारच्या नव्या माणसाला भेटणं काही होत नाही
बाहेरचा परिसर आपण जिंकत चाललो आहोत
पण आतल्या हरण्याचं काय ?
हवा शुद्ध करण्यासाठी आटापिटा
पण आत्म्याच्या गुदमरण्याचं काय ?
आपली आवक वाढली पण नियत कमी झाली
संख्या वाढली पण गुणवत्ता घसरली
हा काळ उंच माणसांचा पण खुज्या व्यक्तीमत्वांचा
उदंड फायद्याचा पण उथळ नात्यांचा
जागतीक शांततेच्या गप्पांचापण घरातल्या युद्धांचा
मोकळा वेळ हाताशी पण त्यातली गंमत गेलेली
विविध खाद्यप्रकार पण त्यातली सत्व गेलेली
दोन मिळवती माणसं पण त्यांचे घटस्फोट वाढलेले
घरं नटली पण घरकुलं दुभंगली
दिखाव्याच्या खिडकीत खूप काही मांडलेलं
पण कोठीची खोली रिकामीच
हे पत्र तुमच्यापर्यंत पोहोचवणारं तंत्रज्ञान आज आहे
पण आज आहे तुमचं स्वातंत्र्यही
या पत्राकडे लक्षदेण्याचं किंवा न देण्याचं
यातलं काही वाटलं तर बदला किंवा विसरून जा
कवी : दलाई लामा
अनुवाद : शोभा भागवत
शुक्रवार, ६ नोव्हेंबर, २००९
प्रेमात पडलं की
प्रेम ..
प्रेम ...
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"प्रेम".... शब्द दोन अक्षरांचा, नुसता ऐकला तरी हर्ष होतो आणि उच्चारला तर दोन ओठांमध्ये स्पर्श होतो.
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मी आज..माज़या बापाला रडतांना पाहिले ....
सोमवार, ५ ऑक्टोबर, २००९
हास्यविनोद ....
जवान - ''माफ कीजिये सर, मगर बात यह है कि जब दो घूंट मेरे अन्दर पहुंच जाते हैं तो मैं अपने आपको कर्नल समझने लगता हूं।''
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पत्नी - चलो आज बाहर घूमने चलते हैं । और हां, गाड़ी मैं ड्राइव करूंगी ।
पति - अच्छा ! इसका मतलब जाएंगे कार में और आएंगे अखबार में .....
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एक दिन दो पुराने दोस्त गधे बाजार में मिले। एक गधा बोला - यार तुम तो बहुत कमजोर हो गए हो। क्या तुम्हारा मालिक तुम्हें ठीक से खाने पीने को नहीं देता ?
दूसरे गधे ने ठंडी सांस भरकर कहा - हां दोस्त, खाने पीने को तो ठीक से मिलता ही नहीं है साथ ही काम भी बहुत करवाता है। मेरा मालिक सचमुच बहुत खराब आदमी है।
पहले गधे ने कहा - तो फिर ऐसे मालिक को तुम छोड़ क्यों नहीं देते ? किसी दिन मौका देखकर भाग जाओ न ?
दूसरा गधा - मैं भाग नहीं सकता ।
पहला गधा - पर क्यों ?
दूसरा गधा - मेरे मालिक की एक बहुत ही खूबसूरत बेटी है। जब भी वह उस पर नाराज होता है तो मेरी तरफ इशारा करके उससे कहता है कि ''देखना, एक दिन तेरी शादी मैं इस गधे से कर दूंगा'' ....... अब यार, मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं ......
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