जसं मुक्या माणसाला साखर खायला दिली तर तो साखरेची चव कशी सांगणार? तो फक्त गोड हसेल.प्रेमाचे पण अगदी तसेच आहे. प्रेम ही मनाची भाषा आहे. ती सांगून समजत नाही , ती भाषा उमजावी लागते.
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"प्रेम".... शब्द दोन अक्षरांचा, नुसता ऐकला तरी हर्ष होतो आणि उच्चारला तर दोन ओठांमध्ये स्पर्श होतो.
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