शुक्रवार, ६ नोव्हेंबर, २००९

प्रेम ...

जसं मुक्या माणसाला साखर खायला दिली तर तो साखरेची चव कशी सांगणार? तो फक्त गोड हसेल.प्रेमाचे पण अगदी तसेच आहे. प्रेम ही मनाची भाषा आहे. ती सांगून समजत नाही , ती भाषा उमजावी लागते.

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"प्रेम".... शब्द दोन अक्षरांचा, नुसता ऐकला तरी हर्ष होतो आणि उच्चारला तर दोन ओठांमध्ये स्पर्श होतो.

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